Parthenope (2024) – Review
Hindi | English | Italian | Fantasy/Drama | 2h 16m | 6.5/10 | Prime Video
कुछ लोग अपनी खूबसूरती की वजह से दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लेते हैं, लेकिन उनके भीतर की दुनिया अक्सर उतनी ही उलझी और उदास होती है। ‘Parthenope’ ऐसी ही एक लड़की की कहानी है, जो जिंदगी को सिर्फ जीना नहीं चाहती, बल्कि उसे समझना चाहती है।
पार्थेनोप बेहद खूबसूरत और रहस्यमयी युवती है। उसके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण है कि लोग अनायास ही उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं। लेकिन वह किसी को अपने बेहद करीब आने की आसानी से इजाजत नहीं देती। वह लोगों से मिलती है, उनसे कुछ सीखती है और फिर अपनी राह पर आगे बढ़ जाती है।
उसकी दिलचस्पी एंथ्रोपोलॉजी में है। इंसान कैसे सोचता है, उसका व्यवहार कैसा होता है, समाज और सभ्यता उसे किस तरह बदलते हैं—पार्थेनोप इन सवालों को समझना चाहती है। उसके लिए पढ़ाई सिर्फ डिग्री हासिल करने का जरिया नहीं है। वह इंसानी जिंदगी के उन हिस्सों को जानना चाहती है, जिनका कोई आसान जवाब नहीं होता।
खुशी आखिर आती कहां से है? इंसान सुंदर होने के बावजूद अधूरा क्यों महसूस करता है? और जिंदगी में सुख के साथ दुख क्यों जुड़ा रहता है?
फिल्म इन्हीं सवालों के आसपास धीरे-धीरे अपना संसार बनाती है।
पार्थेनोप की जिंदगी में कई तरह के लोग आते हैं—एक लेखक, बचपन का दोस्त, अभिनेत्री, अमीर कारोबारी, माफिया, पादरी और प्रोफेसर। हर व्यक्ति उसके लिए जिंदगी की किताब का एक नया पन्ना बन जाता है। वह हर मुलाकात में कुछ तलाशती है, जैसे सामने वाला इंसान उसे उसके अपने किसी अनजाने हिस्से तक पहुंचा सकता हो।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका विजुअल ट्रीटमेंट है। समुद्र, शहर, इमारतें, लोगों के चेहरे और पार्थेनोप का पूरा सफर कई जगह किसी पेंटिंग की तरह दिखाई देता है। कैमरा कई दृश्यों को जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें ठहरकर देखने का मौका देता है।
और यही बात इस फिल्म को खास भी बनाती है और कुछ दर्शकों के लिए मुश्किल भी।
कई दृश्य ऐसे हैं जहां कहानी जैसे रुक जाती है। आपको लग सकता है कि अब फिल्म आगे क्यों नहीं बढ़ रही। लेकिन शायद यही इसका उद्देश्य है। पार्थेनोप खुद भी जिंदगी को किसी तेज रफ्तार सफर की तरह नहीं जी रही। वह रुकती है, देखती है, महसूस करती है और फिर आगे बढ़ती है।
फिल्म में बोल्ड और अंतरंग दृश्य भी हैं। ये दृश्य कहानी के भावनात्मक और शारीरिक पहलुओं का हिस्सा हैं, लेकिन हर दर्शक इनके साथ सहज हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए इसे देखने का फैसला अपने मिजाज और सहजता के हिसाब से करना बेहतर होगा।
पार्थेनोप की खूबसूरती फिल्म में सिर्फ उसकी पहचान नहीं है। उसके जरिए फिल्म एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—क्या बाहरी सुंदरता इंसान को वह सब दे सकती है जिसकी उसे जिंदगी में तलाश है?
वह चाहती तो अपनी खूबसूरती को अपनी ताकत बनाकर बहुत कुछ हासिल कर सकती थी। लेकिन उसका रास्ता अलग है। वह दूसरों की नजरों में खूबसूरत दिखने से ज्यादा अपने भीतर के सवालों के जवाब खोजने में दिलचस्पी रखती है।
फिल्म में एक समय वह अभिनय की दुनिया की तरफ भी आकर्षित होती है। लेकिन उस दुनिया की चमक के पीछे छिपी वास्तविकता से सामना होने के बाद उसका नजरिया बदल जाता है। यहां फिल्म यह याद दिलाती है कि जो चीज बाहर से बेहद खूबसूरत दिखाई देती है, जरूरी नहीं कि भीतर से भी उतनी ही खूबसूरत हो।
अपने भाई की मृत्यु के बाद पार्थेनोप के भीतर का भावनात्मक संघर्ष भी सामने आता है। उसके बाद उसके लिए जिंदगी को देखने का नजरिया और गहरा हो जाता है। कई रिश्ते, मुलाकातें और अनुभव धीरे-धीरे उसके अंदर जमा होते जाते हैं।
एक बेहद खूबसूरत विचार यह भी है कि कभी-कभी हम खुशी को उन जगहों पर खोजते रहते हैं जहां वह होती ही नहीं। हम दूसरे लोगों, रिश्तों, सुंदरता, सफलता और अनुभवों में अपने खालीपन को भरना चाहते हैं। लेकिन अंततः खुद को समझना ही सबसे मुश्किल काम साबित होता है।
फिल्म का संगीत भी इसके वातावरण को मजबूत करता है। कई दृश्यों में संगीत और सिनेमेटोग्राफी मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि कहानी से ज्यादा उस पल को महसूस करने का मन करता है।
हालांकि फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जिन्हें देखकर लगेगा कि इन्हें छोटा किया जा सकता था। कहानी की गति काफी धीमी है और कई जगह यह धैर्य की परीक्षा लेती है। जो दर्शक तेज कहानी, लगातार घटनाओं और साफ-साफ जवाबों वाली फिल्मों के आदी हैं, उन्हें Parthenope काफी स्लो लग सकती है।
लेकिन अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो कहानी सुनाने से ज्यादा एक एहसास पैदा करती हैं, तो यह अनुभव अलग हो सकता है।
फिल्म के अंत में जब उम्र के आखिरी पड़ाव पर पार्थेनोप समुद्र के पास खड़ी दिखाई देती है, तो उसके चेहरे और पूरे सफर को देखकर एक अजीब-सी अनुभूति होती है। जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी शायद कुछ चीजें हमेशा अधूरी रह जाती हैं।
शायद जिंदगी का मतलब हर सवाल का जवाब पा लेना नहीं है। शायद कुछ सवालों के साथ जीना ही जिंदगी है।
‘Parthenope’ उन लोगों के लिए नहीं है जो फिल्म में सिर्फ कहानी ढूंढते हैं। यह उन दर्शकों के लिए है जो ठहरकर किसी दृश्य को देखना, किसी किरदार को समझना और जिंदगी के छोटे-छोटे एहसासों को महसूस करना पसंद करते हैं।
अगर आपको धीमी गति वाली, खूबसूरत विजुअल्स और गहरे भावनात्मक विचारों वाली फिल्में पसंद हैं, तो इसे एक मौका दिया जा सकता है। बाकी दर्शकों के लिए यह दो घंटे से ज्यादा लंबी और कई जगह जरूरत से ज्यादा धीमी महसूस हो सकती है। (Read Also)
मेरी रेटिंग: ⭐ 6.5/10
Parthenope (2024)
🎬 Fantasy / Drama
🕒 2h 16m
🌐 Hindi | English | Italian
📺 Prime Video
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