एक समय था जब भोजपुरी फिल्म रिलीज होते ही सिनेमाघरों में भीड़ लग जाती थी। गांव, परिवार, रिश्ते, मिट्टी की खुशबू और भोजपुरी संस्कृति से जुड़ी कहानियां दर्शकों को अपनी ओर खींचती थीं। लेकिन अब कई भोजपुरी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करना पड़ रहा है।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
सबसे बड़ा कारण है कहानी में नयापन की कमी। एक जैसी प्रेम कहानी, बदला, पारिवारिक विवाद और विलेन वाला फॉर्मूला बार-बार देखने को मिलता है। आज का दर्शक हिंदी, साउथ और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में अलग-अलग तरह की कहानियां देख रहा है। इसलिए पुरानी कहानी देखकर वह थिएटर जाने से बचता है।
दूसरी बड़ी समस्या भोजपुरी सिनेमा की अपनी पहचान का कमजोर होना है। भोजपुरी फिल्मों की असली ताकत बिहार, पूर्वांचल की संस्कृति, गांव की जिंदगी, रिश्ते और आम लोगों की कहानियां रही हैं। जब फिल्में दूसरी इंडस्ट्री की नकल जैसी लगने लगती हैं, तो दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस नहीं कर पाता।
सिर्फ बड़े स्टार के भरोसे भी फिल्म नहीं चल सकती। स्टार दर्शकों को थिएटर तक ला सकता है, लेकिन उन्हें पूरी फिल्म देखने और दूसरों को बताने के लिए अच्छी कहानी चाहिए।
भोजपुरी सिनेमा में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है मजबूत कहानी, बेहतर स्क्रीनप्ले और ऐसे किरदारों की जिनसे आम दर्शक खुद को जोड़ सके।
अश्लील गानों और कंटेंट की वजह से बनी भोजपुरी सिनेमा की छवि भी एक बड़ी चुनौती है। हर भोजपुरी फिल्म ऐसी नहीं होती, लेकिन कुछ फिल्मों और गानों का असर पूरी इंडस्ट्री की छवि पर पड़ता है। परिवार के साथ फिल्म देखने वाला दर्शक ऐसी फिल्मों से दूरी बनाना पसंद कर सकता है।
एक और बड़ा बदलाव OTT और YouTube की वजह से आया है। आज दर्शक घर बैठे हजारों फिल्में और वेब सीरीज देख सकता है। इसलिए थिएटर जाने के लिए फिल्म में ऐसा अनुभव होना जरूरी है जो मोबाइल पर नहीं मिल सकता।
भोजपुरी सिनेमा का भविष्य खत्म नहीं हुआ है। भोजपुरी भाषा के करोड़ों दर्शक हैं और भोजपुरी संगीत की लोकप्रियता आज भी बहुत ज्यादा है।
जरूरत सिर्फ इतनी है कि निर्माता दर्शकों की बदलती पसंद को समझें और भोजपुरी की मिट्टी से जुड़ी ऐसी कहानियां बनाएं जिनमें आधुनिक सोच, अच्छा अभिनय और मजबूत मनोरंजन हो।
सच्चाई यही है कि दर्शक भोजपुरी फिल्म से दूर नहीं हुआ है। वह सिर्फ एक ऐसी अच्छी भोजपुरी फिल्म का इंतजार कर रहा है जिसे देखकर वह गर्व से कह सके...
“यह फिल्म हमारी भाषा, हमारी मिट्टी और हमारी कहानी है।”
भोजपुरी सिनेमा को दर्शक बदलने की नहीं, फिल्म बनाने का तरीका बदलने की जरूरत है। Read Also
